गुरुवार, 18 मार्च 2010

80% व्यक्ति इंटरनेट को बुनियादी अधिकार मानते हैं

दुनिया के 26 देशों में हुए एक नए सर्वे में पाया गया है कि हर पांच में से चार शख्स इंटरनेट पहुँच को बुनियादी अधिकार मानते हैं। इन देशों में भारत भी शामिल है। सर्वे इन देशों के 27 हजार वयस्क लोगों के बीच किया गया। यह सर्वे बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के लिए ग्लोबस्कैन ने आयोजित किया।

सर्वे में शामिल 87 प्रतिशत लोगों ने कहा कि इंटरनेट तक पहुँच को सभी लोगों के लिए बुनियाद अधिकार होना चाहिए। सर्वे में शामिल लोगों में से कुल मिलाकर 79 प्रतिशत ने इस बात के प्रति किसी न किसी रूप में सहमति दिखाई कि इंटरनेट बुनियादी अधिकार है।

इंटरनेट पहुँच के अधिकार के प्रति मेक्सिको, ब्राजील और तुर्की जैसे देशों के प्रतिभागियों ने मजबूती से समर्थन दिखाया। सर्वे में शामिल तुर्की के 90 प्रतिशत से ज्यादा लोगों कहा कि इंटरनेट पहुँच बुनियादी अधिकार होना चाहिए। यह संख्या किसी यूरोपीय देश के मुकाबले कहीं ज्यादा थी। उत्तर कोरिया में सबसे ज्यादा 96 प्रतिशत लोगों ने कहा कि इंटरनेट ऐक्सेस बुनियादी अधिकार होना चाहिए।

सर्वे में शामिल ज्यादातर लोगों ने कहा कि इंटरनेट का जीवन पर सकारात्मक असर पड़ता है। हर पांच में से चार शख्स ने कहा कि इंटरनेट से हमें ज्यादा आजादी मिलती है। हालांकि सर्वे में शामिल कई इंटरनेट उपयोगकर्ताओं ने इंटरनेट जालसाजी और निजता को खतरे के प्रति चिंता का इजहार भी किया।

1 टिप्पणी:

  1. पाबला जी के बारे मे मैं इतना कहना चाहूंगा, कि इन्टरनेट का जब इतिहास लिखा जायेगा तो आप का नाम उच्चतम श्रेणी में होगा, खासतौर से हिन्दी सेवा और नेट पर हिन्दी ब्लागरों का उत्साहवर्धन करने के लिए, आप को मेरा सलाम सूचना के इस बेहतरीन हथियार को चलाने के लिए मार्गदर्शन देनें के लिए।

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