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शुक्रवार, 21 अक्टूबर 2011

फेसबुक बदल रहा है दिमाग की संरचना


हाल ही में हुए एक अध्ययन में दावा किया गया है कि सोशल नेटवर्किंग साइट पर ढेर सारे दोस्तों वाले व्यक्तियों के दिमाग में एक खास तरह का पदार्थ ज्यादा सघन पाया जाता है जिससे इस बात की संभावना बढ़ी है कि इस तरह के साइट लोगों के दिमाग को बदल रहे हैं।

लंदन के यूनिवर्सिटी कॉलेज के अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि जिन व्यक्तियों के फेसबुक पर बहुत ज्यादा दोस्त होते हैं, उनमें दिमाग के कुछ हिस्सों में कम ऑनलाइन दोस्तों वालों की तुलना में ज्यादा ग्रे पदार्थ पाया जाता है। दिमाग के ये क्षेत्र नामों और चेहरों को याद रखने की क्षमता से जुड़े होते हैं।

प्रोसिडिंग्स ऑफ रॉयल सोसाइटी बायोलोजिकल साइंसेज में प्रकाशित अध्ययन में बताया गया कि या तो सोशल नेटवर्किंग साइट दिमाग के इन भागों को बदल देते हैं या इस तरह के दिमाग के साथ पैदा लेने वाले व्यक्ति फेसबुक जैसी वेबसाइट पर अलग व्यवहार करते हैं।

सोमवार, 23 अगस्त 2010

जीवन साथी की तलाश है तो घर में इंटरनेट कनेक्शन लगवा लीजिए

एक हालिया अध्ययन की रिपोर्ट कह रही है कि जीवन साथी ढूंढने के लिए ऑनलाइन डेटिंग सबसे ज्यादा प्रभावशाली जरिया है। वैसे वयस्क जिन्होंने अपने घरों में इंटरनेट कनेक्शन लगा रखे हैं उनके रोमांटिक संबंधों में पड़ने की संभावना होती है और संबंधों को जोड़ने का काम करता है इंटरनेट। जिसे यूं ही नहीं अपार संभावनाओं वाला माध्यम कहा गया है।

मतलब, अगर आपको भी एक अदद जीवन साथी की तलाश है तो घर में इंटरनेट कनेक्शन लगवा लीजिए। इसका प्रयोग करने वाले दूसरों के मुकाबले अपना जीवन साथी जल्द ढूंढ लेते हैं। जो लोग ऑनलाइन प्यार ढूंढने में विश्वास नहीं रखते उन्हें इसके लिए ज्यादा संघर्ष करना पड़ता है।


अध्ययनकर्ताओं का मानना है कि ऑनलाइन डेटिंग जल्द ही आपको आपके प्यार से मिलाने वाले दोस्तों की भूमिका खत्म कर देगी। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी, कैलिफोर्निया के एसोसिएट प्रो. माइकल जे रोजेनफेल्ड का कहना है कि यह रिपोर्ट ऐसे कई अध्ययनों पर सवाल खड़ा कर रही है जिसमें कहा गया है कि इंटरनेट लोगों को रिश्तों से दूर ले जा रहा है। उन्होंने बताया कि इंटरनेट डेटिंग में सबसे ज्यादा दिलचस्पी अधेड़ उम्र के लोगों की हैं। इस लिस्ट में तलाकशुदा लोग भी शामिल हैं। अध्ययन में 4,002 वयस्कों के साथ साथ 3,009 जोड़ों को भी शामिल किया गया था

अटलांटा में अमेरिकन सोशियोलजिकल एसोसिएशन की 105वीं आम सभा में इस संबंध में अनुसंधान पत्र पेश किया गया था। इस अनुसंधान निष्कर्ष का नाम "मीटिंग आनलाइन: द राइज ऑफ द इंटरनेट एज ए सोशल इंटरमीडियरी" है।

अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें

गुरुवार, 18 मार्च 2010

80% व्यक्ति इंटरनेट को बुनियादी अधिकार मानते हैं

दुनिया के 26 देशों में हुए एक नए सर्वे में पाया गया है कि हर पांच में से चार शख्स इंटरनेट पहुँच को बुनियादी अधिकार मानते हैं। इन देशों में भारत भी शामिल है। सर्वे इन देशों के 27 हजार वयस्क लोगों के बीच किया गया। यह सर्वे बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के लिए ग्लोबस्कैन ने आयोजित किया।

सर्वे में शामिल 87 प्रतिशत लोगों ने कहा कि इंटरनेट तक पहुँच को सभी लोगों के लिए बुनियाद अधिकार होना चाहिए। सर्वे में शामिल लोगों में से कुल मिलाकर 79 प्रतिशत ने इस बात के प्रति किसी न किसी रूप में सहमति दिखाई कि इंटरनेट बुनियादी अधिकार है।

इंटरनेट पहुँच के अधिकार के प्रति मेक्सिको, ब्राजील और तुर्की जैसे देशों के प्रतिभागियों ने मजबूती से समर्थन दिखाया। सर्वे में शामिल तुर्की के 90 प्रतिशत से ज्यादा लोगों कहा कि इंटरनेट पहुँच बुनियादी अधिकार होना चाहिए। यह संख्या किसी यूरोपीय देश के मुकाबले कहीं ज्यादा थी। उत्तर कोरिया में सबसे ज्यादा 96 प्रतिशत लोगों ने कहा कि इंटरनेट ऐक्सेस बुनियादी अधिकार होना चाहिए।

सर्वे में शामिल ज्यादातर लोगों ने कहा कि इंटरनेट का जीवन पर सकारात्मक असर पड़ता है। हर पांच में से चार शख्स ने कहा कि इंटरनेट से हमें ज्यादा आजादी मिलती है। हालांकि सर्वे में शामिल कई इंटरनेट उपयोगकर्ताओं ने इंटरनेट जालसाजी और निजता को खतरे के प्रति चिंता का इजहार भी किया।