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शनिवार, 9 जुलाई 2011

हर तीसरी भारतीय पत्नी पिटती है और पिटना सही भी मानती है

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में 35 प्रतिशत महिलाएं हिंसा का शिकार होती हैं जबकि दस प्रतिशत महिलाओं के साथ उनके पार्टनर ही यौन हिंसा करते हैं। नई दिल्ली में जारी इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में 39 प्रतिशत पुरुष और महिलाएं यह भी मानते हैं कि पति का पत्नी को पीटना ‘कभी कभी या हमेशा’ सही होता है। संयुक्त राष्ट्र महिला नाम से नवगठित संयुक्त राष्ट्र की एक संस्था ने यह रिपोर्ट प्रकाशित की है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन महिलाओं से बात की गई है उनमें से 35 प्रतिशत के अनुसार उनके पार्टनर (पति या पार्टनर) उन्हें शारीरिक रुप से प्रताडित करते हैं. इनमें से से दस प्रतिशत का कहना था कि उनके पति या पार्टनर भी उन्हें यौन हिंसा का शिकार बनाते हैं। इस रिपोर्ट में एक गैर सरकारी संस्था द्वारा किए गए सर्वे के हवाल से कहा गया है कि 68 प्रतिशत महिलाएं मानती हैं कि उत्तेजक कपड़े पहनना बलात्कार को बुलावा देना होता है। संयुक्त राष्ट्र की यह संस्था दुनिया भर में महिलाओं की स्थिति की जानकारी जुटाती है।

संस्था ने भारतीय न्याय व्यवस्था में महिलाओं की मात्र तीन प्रतिशत भागीदारी की कड़ी आलोचना की है। इस वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार भारत महिला जजों के मामले में बहुत पीछे हैं. यहां सिर्फ तीन प्रतिशत जज महिलाएं हैं और देश के हर कोर्ट में महिलाओं का प्रतिनिधित्व काफी कम है। यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र महिला की सह महासचिव लक्ष्मी पुरी ने जारी की। उनका कहना था कि प्रभावितों को न्याय दिलाने के लिए लैंगिक समानता अत्यंत ज़रुरी है लेकिन भारत की न्याय व्यवस्था में महिलाओं का प्रतिनिधित्व कम होना निराशाजनक स्थिति दर्शाता है। रिपोर्ट के अनुसार पुलिस और जजों में महिलाओं के प्रति भेदभाव के रवैय्ये के कारण कई बार महिलाएं हिंसा की रिपोर्ट लिखाने में भी हिचकिचाती हैं।

मूल समाचार यह है

सोमवार, 4 जुलाई 2011

महिलाओं को पाने की जद्दोजहद ने पुरूषों को बलशाली बनाया!

आम तौर पर महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले नैसर्गिक और प्राकृतिक रूप से ही कमजोर माना जाता है, लेकिन हाल के एक शोध से पता चला है कि महिलाओं को पाने की लड़ाई में अपने प्रतिद्वंद्वी पर वर्चस्व स्थापित करने की जद्दोजहद में ही पुरुषों का माथा और जबड़ा ज्यादा मजबूती से विकसित हुआ।



शोध के अनुसार अतीत में अपने साथी को पाने के लिए पुरुषों को शारीरिक ताकत का इस्तेमाल करना पड़ता था। इस क्रम में मजबूत जबड़े और मोटी खोपड़ी वाले पुरुष ही महिला साथी को पाने की लड़ाई में विजेता होते थे। इसी क्रम में क्रमिक विकास की वजह से हुए अनुकूलन के कारण कालांतर में भी पुरुषों का सिर और जबड़ा महिलाओं की अपेक्षा मजबूत विकसित होता चला गया। शोध में यह भी दावा किया गया है कि इसी क्रमिक विकास की वजह से पुरुषों की मांसपेशियां महिलाओं की अपेक्षा अधिक विकसित हुईं, जिसकी वजह से उनकी कद काठी महिलाओं के मुकाबले अधिक मजबूत और लंबी हुई।

इवोल्यूशन एंड ह्यूमन बिहेवियर शोध पत्रिका में प्रकाशित डॉ डेविड पुट्स के शोध के अनुसार मनुष्य की प्रजाति में ही नर में मांसपेशियां और मादा में वसा कोशिकाओं की वृद्वि देखी जा सकती हैं, जबकि अन्य प्रजातियों में नर और मादा में सभी प्रकार की कोशिकाओं का विकास समान रुप से हुआ है। पेंसिलवेनिया विश्वविद्यालय के डॉ पुट्स के बयान को रेखांकित करते हुए लंदन का डेली टेलिग्राफ लिखता है, सामान्यत: पुरुष महिलाओं की अपेक्षा 15 प्रतिशत से अधिक लंबे नहीं होते है, लेकिन ताकत के मुकाबले में लगभग शत प्रतिशत पुरुष महिलाओं से ज्यादा मजबूत होते है।

पुट्स के मुताबिक पुरुष महिलाओं की अपेक्षा अधिक आक्रामक होते है कुछ घुमंतू समुदाय में तो 30 प्रतिशत पुरुष मरने मारने की हद तक आक्रामक होते हैं। उनका मानना है कि भारी आवाज महिलाओं को आकर्षित करती है, लेकिन वास्तव में यह पुरुषों के वर्चस्व का प्रतीक है। भारी आवाज मर्द को शक्तिशाली और गंभीर बनाती है। यहां तक कि कई बार आवाज का भारीपन यौन आकर्षण से भी अधिक प्रभावी होता है। अन्य प्रजातियों की तुलना में इन्सानों के पास अपने प्रतिद्वंद्वियों के साथ झगड़ा करने के लिए नुकीले पंजे और दांत नहीं होते, लेकिन इस काम के लिए उन्होंने धनुष बाण, तलवार और चाकू जैसे हथियारों का निर्माण किया।

ड़ॉ पुट्स का मानना है कि हवा में रहने वाले पक्षी और पानी में रहने वाले जलचर प्राणी अपने मादा साथी को हासिल करने के लिए शारीरिक प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकते, क्योंकि उनके सामने एक समय में अनेक प्रतिद्वंद्वी मौजूद होंगे, जिनपर विजय हासिल कर पाना उनके लिए संभव नही होगा।

यह रहा मूल समाचार

गुरुवार, 16 जून 2011

बेटी चाहते हैं ? सुन्दर पार्टनर ढूंढिए

क्या आप भी बेटी चाहते हैं अगर हां तो अपने लिए एक सुन्दर पार्टनर तलाश कीजिए। क्योंकि एक शोध के मुताबिक सुन्दर दिखने वाले जोड़ों की बेटी पैदा होने की संभावना ज्यादा होती है। रिप्रोडक्टिव साइंसेज में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार सुन्दर औरतों और मर्दों में कम सुन्दर दिखने वालों की तुलना में बेटी होने की संभावना ज्यादा होती है।

(एक प्रतीकात्मक चित्र)

लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स की विकासवादी मनोविज्ञानी सातोषी कानजवा ने मार्च 1958 में ब्रिटेन में जन्मे 1700 बच्चों का अध्ययन किया है। उन्होंने सभी बच्चों के बारे में उनके जीवन के अनेक स्तरों का अध्ययन किया। अध्ययन में यह देखा गया कि स्कूल और कॉलेज में इन बच्चों को उनके शिक्षकों ने सुन्दर कहा या बदसूरत। और 45 साल की उम्र में इन्हीं लोगों से उनके बच्चों और बच्चों के लिंग के बारे में पूछा गया।

सभी आंकड़ों को जमा करने के बाद कानजवा ने पाया कि अध्ययन के लिए लिए गए नमूने वाले लोगों में से 84 प्रतिशत लोगों को बेटे और बेटियां दोनों हुई, जबकि जो लोग खूबसूरत नहीं थे उन्हें बेटे ज्यादा हुए।

कानजवा ने कहा कि शारीरिक तौर पर सुन्दर होना कन्या शिशु तय करने के लिए एक मजबूत निर्धारक है। औसतन बदसूरत लोगों में से 56 में बेटे के माता-पिता बनने की संभावना सबसे ज्यादा होती है। उनका मानना है कि हम बच्चों के लिंग को सुन्दरता के साथ जोड़कर जिस लिंग के बच्चे चाहें पैदा कर सकते हैं।

मर्दों के लिए यह बात हमेशा आसान रहती है क्योंकि वे शादी के रिश्ते में हों या फिर अफेयर की बात हो अपने लिए एक सुन्दर पार्टनर ही खोजते हैं। मगर औरतें सिर्फ अफेयर के लिए ही सुन्दरता को देखती हैं, दीर्घकालिक बंधन के लिए वे हमेशा पैसे, सामाजिक स्थिति जैसी चीजों को देखती हैं

गुरुवार, 26 अगस्त 2010

यह सच नहीं कि महिलाएं गठीले बदन को पसंद करती है, सच यह है कि ........

एक ताजा अध्ययन में यह बात सामने आई है कि महिलाएं जॉन अब्राहम, अक्षय कुमार फिर सलमान खान जैसे गठीले शरीर वाले पुरुषों की तरफ भले ही आकर्षित होती हों, लेकिन सम्बन्ध बनाने के लिए वे चीजों की मरम्मत करने में सक्षम मर्दों को ही तरजीह देती हैं। तीन हजार महिलाओं पर किए गए इस शोध में जवाब देने वाली करीब 75 प्रतिशत औरतों ने कहा कि वे खुद को फिट रखने की कवायद में घंटों गुजारने वाले मर्दों के बजाय वैसे पुरुषों की तरफ ज्यादा आकर्षित होती हैं जो गैजेट तथा प्रौद्योगिकी के बारे में बेहतर रूप से समक्ष होते हैं।

डेली एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक करीब 50 प्रतिशत महिलाओं ने कहा कि वे अपने घर में ऐसे व्यक्ति को देखना चाहती हैं जो टेलीविजन, स्टीरियो तथा कम्प्यूटर में होने वाली तकनीकी खराबियों को दूर करने में सक्षम हो। आधी से ज्यादा महिलाओं ने कहा कि चीजों को बनाने की काबिलियत रखने वाले व्यक्ति के साथ रहने से उन्हें अच्छा महसूस होता है। बहरहाल, तीन में से सिर्फ एक महिला ने ही गठीले बदन वाले पुरुषों को पसंद करने की बात कही।

बुधवार, 25 अगस्त 2010

क्या आप जानते हैं कि महिलाएँ अपनी बेहद निजी बातें किसे बताती हैं!?

एक आम धारणा के अनुसार कुत्तों को पुरूषों का सबसे अच्छा मित्र माना जाता है लेकिन वास्तव में महिलाएं पालतू जानवरों के ज्यादा करीब होती हैं। एक सर्वेक्षण में खुलासा हुआ है कि कुछ महिलाएं तो कुत्तों को अपनी बेहद निजी बातें बताती हैं। समाचार पत्र 'डेली एक्सप्रेस' के मुताबिक कुत्तों का भोजन बनाने वाली एक कंपनी विनालोट के लिए हुए सर्वेक्षण में हर पांचवीं महिला का कहना था कि जो राज वे किसी से नहीं कह पाती हैं, उन्हें वे अपने कुत्तों को बताती हैं

कुछ महिलाओं का अपने पालतू जानवर के साथ एक मजबूत रिश्ता होता है और 14 प्रतिशत प्रतिभागियों का मानना है कि उनके कुत्ते उनका दिमाग पढ़ लेते हैं। इसके विपरीत मुश्किल से 10 प्रतिशत पुरूष ही अपने कुत्तों से इतने खुले होते हैं।

ज्यादातर, पालतू जानवर को अपना विश्वसनीय साथी बताते हैं। एक तिहाई कुत्ता मालिक उन्हें अपना बहुत ईमानदार साथी बताते हैं और आधे प्रतिभागियों का कहना है कि उनके पालतू जानवर ही उन्हें ज्यादा आशावादी बनाते हैं

सोमवार, 23 अगस्त 2010

जीवन साथी की तलाश है तो घर में इंटरनेट कनेक्शन लगवा लीजिए

एक हालिया अध्ययन की रिपोर्ट कह रही है कि जीवन साथी ढूंढने के लिए ऑनलाइन डेटिंग सबसे ज्यादा प्रभावशाली जरिया है। वैसे वयस्क जिन्होंने अपने घरों में इंटरनेट कनेक्शन लगा रखे हैं उनके रोमांटिक संबंधों में पड़ने की संभावना होती है और संबंधों को जोड़ने का काम करता है इंटरनेट। जिसे यूं ही नहीं अपार संभावनाओं वाला माध्यम कहा गया है।

मतलब, अगर आपको भी एक अदद जीवन साथी की तलाश है तो घर में इंटरनेट कनेक्शन लगवा लीजिए। इसका प्रयोग करने वाले दूसरों के मुकाबले अपना जीवन साथी जल्द ढूंढ लेते हैं। जो लोग ऑनलाइन प्यार ढूंढने में विश्वास नहीं रखते उन्हें इसके लिए ज्यादा संघर्ष करना पड़ता है।


अध्ययनकर्ताओं का मानना है कि ऑनलाइन डेटिंग जल्द ही आपको आपके प्यार से मिलाने वाले दोस्तों की भूमिका खत्म कर देगी। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी, कैलिफोर्निया के एसोसिएट प्रो. माइकल जे रोजेनफेल्ड का कहना है कि यह रिपोर्ट ऐसे कई अध्ययनों पर सवाल खड़ा कर रही है जिसमें कहा गया है कि इंटरनेट लोगों को रिश्तों से दूर ले जा रहा है। उन्होंने बताया कि इंटरनेट डेटिंग में सबसे ज्यादा दिलचस्पी अधेड़ उम्र के लोगों की हैं। इस लिस्ट में तलाकशुदा लोग भी शामिल हैं। अध्ययन में 4,002 वयस्कों के साथ साथ 3,009 जोड़ों को भी शामिल किया गया था

अटलांटा में अमेरिकन सोशियोलजिकल एसोसिएशन की 105वीं आम सभा में इस संबंध में अनुसंधान पत्र पेश किया गया था। इस अनुसंधान निष्कर्ष का नाम "मीटिंग आनलाइन: द राइज ऑफ द इंटरनेट एज ए सोशल इंटरमीडियरी" है।

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