बुधवार, 18 जनवरी 2012

फेसबुक के दीवाने होते हैं अंदर से दुखी

जो लोग सोशल नेटवर्किंग साइट्स फेसबुक को दीवानों की तरह चाहते हैं उनके लिए एक बुरी खबर है। एक शोध के मुताबिक जो लोग फेसबुक को दिन में कई बार लॉगइन करते हैं उनके अंदर दुखी रहने की प्रवृत्ति ज्यादा पायी जाती है।

समाचार पत्र 'डेली मेल' ने ऊटा वैली विश्वविद्यालय द्वारा किए गए अध्ययन के आधार पर  लिखा है कि जो लोग फेसबुक को दिन में कई बार प्रयोग करते हैं उनके अंदर फेसबुक का उपयोग ना करने वालों की तुलना में खुश रहने की आदत कम पायी जाती है। 

अध्ययन में यह बात सामने आई कि फेसबुक प्रयोग करने वाले लोगों में अपने पेज पर हंसते मुस्कराते चेहरे लगाने की प्रवृत्ति होती है, जिसके माध्यम से वे दूसरों को कमजोर संदेश देने की कोशिश की जाती है। ऐसे लोगो में यह चीज भी देखी गयी है कि वो इस बात को मानना भी नहीं चाहते है कि वो अंदर से दुखी है। 

दूसरों की हंसती मुस्कुराती अच्छी अच्छी फोटो देख कर ऐसे लोग यह मानते हैं कि सामने वाले की तुलना में वे हीन हैं और कुढ़ना शुरू कर देते हैं जिसका परिणाम कई बार टिप्पणियों में झलकने लगता है. 


इसके उलट, जो लोग वास्तविक जीवन में सामाजिक होते हैं वे आभासी दुनिया में जीने वाले लोगों की तुलना में कम दुखी होते हैं। यह निष्कर्ष वैज्ञानिक पत्रिका 'साइबरसाइकोलॉजी, बिहैवियर एंड सोशल नेटवर्किंग' में प्रकाशित हुआ है।

ऎसी ही एक रिपोर्ट पिछले वर्ष भी आई थी जिसे एंटी सोशल नेटवर्क का शीर्षक दिया गया था. 

2 टिप्‍पणियां:

  1. फिर तो मैं बहुत दुखी हूँ ... मैंने तो हर समय ही फेसबुक पर लोगिन रहता हूँ ... साथ साथ मेरी बहुत बुरी आदत है अपने कमेन्ट के बाद :) लगाने की ... ;-)

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  2. सर हमसे तो ससुरा फ़ेसबुक दुखी रहता है ....हा हा हा हा

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