शनिवार, 31 जुलाई 2010

स़डक हादसों की वजह खूबसूरत ल़डकियां और उनका पहनावा!

बात केवल भारत की नहीं सभी जगह लगभग यही हाल है जैसा कि एक सर्वेक्षण में पाया गया है कि ब्रिटेन में गर्मियों में पुरूष अधिक कार दुर्घटनाओं का शिकार होते हैं क्योंकि कार चलाते वक्त उनका ध्यान छोटे कप़डे पहने ल़डकियों की ओर भटक जाता है। अब वहां ठण्ड इतनी रहती है कि गर्मियों में ही कम कपडे पहने जाते हैं!


29 फीसदी पुरूषों ने स्वीकार किया है कि गर्मियों में ग़ाडी चलाते वक्त वे मिनी स्कर्ट और छोटे टॉप पहनने वाली ल़डकियों और महिलाओं को देखने के चक्कर में स़डक पर एकाग्रता नहीं बना पाते। कुल 1300 से अधिक चालकों पर किए गए सर्वेक्षण में पाया गया है कि इनमें से 25 फीसदी पुरूष चालक पिछले पांच वर्षो में कम से कम एक बार दुर्घटना का शिकार जरूर हुए या फिर बाल-बाल बच गए, जबकि 17 फीसदी महिलाओं के नजर वाहन चलाते वक्त भटके।

मनोवैज्ञानिक डोना डॉवसन ने इस बारे में कहा, ""सर्वेक्षण से पता चलता है कि महिलाओं की तुलना में पुरूष ज्यादा दुर्घटना के शिकार होते हैं।"" इस सर्वेक्षण को कराने वाली कार बीमा कंपनी शेइलास के मुताबिक पिछले साल जून से अगस्त के बीच महिलाओं की तुलना में 16 फीसदी अधिक पुरूषों ने बीमा का दावा किया। इसके विपरीत केवल तीन फीसदी महिलाओं ने माना कि वे गर्मियों में पुरूषों के पहनावे से आकर्षित होती हैं और वाहन चलाते समय वे उन्हें देखती हैं।

शुक्रवार, 18 जून 2010

चाय पीने से गठिया का खतरा बढ़ता है

चाय के शौकीनों के लिए यह एक बुरी खबर हो सकती है। एक नए अध्ययन में पता चला है कि चाय पीने से गठिया का खतरा बढ़ता है।

शोधकर्ताओं ने 76 हजार से भी ज्यादा महिलाओं पर किए अध्ययन के बाद यह निष्कर्ष निकाला है। अध्ययन में पाया गया कि जिन महिलाओं को चाय पीने की आदत थी, उनमें गठिया का खतरा बढ़ गया, जबकि कॉफी या दूसरे पेय पदार्थो का सेवन करने वाली महिलाओं में गठिए का असर नहीं देखा गया। शोधकर्ताओं के अनुसार दिन भर में चससर कप से ज्यादा चाय पीने वालों में गठिए का खतरा 78 फीसदी तक बढ़ गया।

हालांकि, ऎसा नहीं है कि ज्यादा पीना ही सेहत के लिए खतरनाक हो। शोधकर्ताओं के अनुसार कम चाय पीने वालों को गठिए का खतरा होता है। अध्ययन के दौरान पाया गया कि जिन लोगों ने 4 कप से कम चाय पी, उनमें भी आमलोगों (जो चाय नहीं पीते)के मुकाबले गठिए का खतरा 40 फीसदी तक अधिक रहता है। अमरीका की जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर के प्रोफेसर क्रिस्टोफर कॉलिंस के अनुसार अध्ययन से प्राप्त नतीजों ने उन्हें अचरज में डाल दिया है।

कॉलिंग ने बताया कि "हमने यह पता लगाने के लिए अध्ययन किया था कि क्या चाय या कॉफी या दूसरे पेय पदार्थो का गठिए से कोई संबंध है। लेकिन अध्ययन से जो नतीजें आए हैं, वो चौंकाने वाले हैं।" शोधकर्ता के अनुसार "चाय और कॉफी के सेहत पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में कभी इस तरह से हमने नहीं सोचा था। हमें लगता था कि चाय अथवा कॉफी का सेहत पर पड़ने वाला असर लगभग एकजैसा ही होगा। लेकिन हम यह देखकर आश्चर्यचकित हैं कि चाय और कॉफी सेहत पर एक-दूसरे से बिल्कुल अलग प्रभाव डालते हैं।"

मंगलवार, 1 जून 2010

चाय में दूध मिलाने से इसके सारे फायदे खत्म हो जाते हैं।

सुबह-सुबह उठने के बाद एक कप गर्म-गर्म चाय की सभी को तलब होती है। वैसे, ज्यादातर लोगों को अपनी चाय थोड़े दूध के साथ पसंद होती है। एक ताजा सुबह देने के साथ काम के बीच में या किसी से मिलने जाने पर भी चाय हमारा साथ देती है। लेकिन दूध वाली चाय पीने के शौकीनों के लिए बुरी खबर यह है कि चाय में दूध मिलाने से इसके सारे फायदे खत्म हो जाते हैं।

जर्मनी के एक शोध समूह ने अपने अध्ययन में पाया है कि सामान्य काली चाय के कुछ कप के फायदे इसमें दूध मिलाने के साथ ही खत्म हो जाते हैं। दरअसल, दूध में मौजूद कैसीन प्रोटीन, चाय के असर को कम कर देता है।

खाद्य-विशेषज्ञ नीति देसाई कहती हैं , 'एक हद तक यह बात सच है। जिस तरह हमारे यहां चाय बनाई जाती है, वह तरीका सही नहीं है। इसकी बजाय चाय को पहले बिना दूध के उबलाना चाहिए। अगर आप बिना दूध के चाय पसंद नहीं करते, तो चाय को कप में डालते वक्त इसमें दूध मिलाएं। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि सादी काली चाय, दूध वाली चाय से बेहतर होती है।'

जड़ी-बूटी व हरी चाय के भी बहुत फायदे हैं और आमतौर पर लोग इन्हें बिना दूध के लेते हैं। हरी चाय, फैट मेटाबॉलिज्म बढ़ाती है, जिसका मतलब हुआ कि इससे शरीर में चर्बी जल्दी पिघलती है। यह देखा गया है कि दिनभर में इसके तीन से पांच कप वजन कम करने में मदद करते हैं।

जड़ी -बूटी चाय मसलन, अदरक चाय, नींबू चाय, पिंपरमिंट चाय वगैरह पाचन क्रिया, पेट दर्द, अधसीसी, गठिया और अच्छी नींद दिलाने में रामबाण का काम करती है।

सोमवार, 3 मई 2010

स्लिम दिखना चाह्ते हैं तो रसदार फल खाना बेहतर

नए शोध बताते हैं कि यदि हमेशा स्लिम दिखना चाह्ते हैं तो रसदार फल खाना बेहतर है। अध्ययन से पता चला है कि खट्टे संतरे जैसे फल के जूस को पीने से हाई फैट डाइट मिलती है। रसदार फलों को खाकर आप भी स्लिम हो सकते हैं। यह वजन को बढ़ने से रोकता है। वहीं दूसरी ओर मीठा संतरा इसके विपरीत वजन बढ़ाने में मददगार होता है। मिलान यूनिवर्सिटी की रिसर्च टीम ने अपने अध्ययन में पाया कि संभवत: फलों की फैट को कम करने की क्षमता इटली या यूएस में पनपी।


संतरे का गहरा रंग इसे एंटीऑक्सीडेंट बनाता है। यह प्राकृतिक रसायन की भांति काम करता है। जो कि बीमारियों को रोकता है। इस अध्ययन को इंटरनेशनल जरनल ऑफ ओबेसिटी में प्रकाशित किया गया है।

बाजार में बिकने वाले फलों के रस को शुद्ध जूस समझ कर पीना सेहत के लिए हानिकारक

वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि बाजार में बिकने वाले फलों के रस को शुद्ध जूस समझ कर पीना सेहत के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकता है। गर्मियों में फलों के डिब्बा बंद रस से बचें क्योंकि ये शरीर में शुगर पहुंचाने के अलावा और कुछ नहीं करते। यदि आपको रस पीना है, तो तत्काल निकालें और पिएं।

वैज्ञानिकों का दावा है कि फलों के ताजा रस से बच्चों की भूख बढ़ती है। रस पीने वाले बच्चे और किशोरों के शरीर में अन्य पेय पदार्थ पीने वाले बच्चों की तुलना में अधिक पोषक तत्व पहुंचते हैं। दो से पांच साल के बच्चों को शुद्ध रस पिलाने से उनके शरीर में विटामिन सी, पौटेशियम और मैग्नीशियम की उचित मात्रा पहुंचती है। जबकि डिब्बा बंद रस से शुगर के अलावा और कुछ नहीं मिलता। लुसियाना स्टेट यूनिवर्सिटी एग्रीकल्चर के वैज्ञानिकों ने यह शोध किया है।

उन्होंने पाया कि रस के सेवन, फल खाने और अनाज युक्त भोजन में सीधा संबंध होता है। उन्होंने कहा फलों के सेवन से शरीर में पोषक पदार्थो के साथ ही प्रचुर मात्रा में फाइबर भी पहुंचते हैं। डाक्टर कैरोल ओ नील ने बताया, 'सौ प्रतिशत शुद्ध रस बच्चों की वृद्धि और विकास में अहम भूमिका निभाता है।' इस शोध को एक्सपेरीमेंटल बायोलाजी में प्रस्तुत किया गया।


इससे पहले भी कहीं पढ़ा था मैने कि:

बंद डिब्बों का रस भूलकर भी उपयोग में न लें। उसमें बेन्जोइक एसिड होता है। यह एसिड तनिक भी कोमल चमड़ी का स्पर्श करे तो फफोले पड़ जाते हैं। और उसमें उपयोग में लाया जानेवाला सोडियम बेन्जोइक नामक रसायन यदि कुत्ता भी दो ग्राम के लगभग खा ले तो तत्काल मृत्यु को प्राप्त हो जाता है। उपरोक्त रसायन फलों के रस, कन्फेक्शनरी, अमरूद, जेली, अचार आदि में प्रयुक्त होते हैं। उनका उपयोग मेहमानों के सत्कारार्थ या बच्चों को प्रसन्न करने के लिए कभी भूलकर भी न करें।

'फ्रेशफ्रूट' के लेबल में मिलती किसी भी बोतल या डिब्बे में ताजे फल अथवा उनका रस कभी नहीं होता। बाजार में बिकता ताजा 'ओरेन्ज' कभी भी संतरा-नारंगी का रस नहीं होता। उसमें चीनी, सैक्रीन और कृत्रिम रंग ही प्रयुक्त होते हैं जो आपके दाँतों और आँतड़ियों को हानि पहुँचा कर अंत में कैंसर को जन्म देते हैं। बंद डिब्बों में निहित फल या रस जो आप पीते हैं उन पर जो अत्याचार होते हैं वे जानने योग्य हैं।

सर्वप्रथम तो बेचारे फल को उफनते गरम पानी में धोया जाता है। फिर पकाया जाता है। ऊपर का छिलका निकाल लिया जाता है। इसमें चाशनी डाली जाती है और रस ताजा रहे इसके लिए उसमें विविध रसायन (कैमीकल्स) डाले जाते हैं। उसमें कैल्शियम नाइट्रेट, एलम और मैग्नेशियम क्लोराइड उडेला जाता है जिसके कारण अँतड़ियों में छेद हो जाते हैं, किडनी को हानि पहुँचती है, मसूढ़े सूज जाते हैं।

जो लोग पुलाव के लिए बाजार के बंद डिब्बों के मटर उपयोग में लेते हैं उन्हें हरे और ताजा रखने के लिए उनमें मैग्नेशियम क्लोराइड डाला जाता है। मक्की के दानों को ताजा रखने के लिए सल्फर डायोक्साइड नामक विषैला रसायन (कैमीकल) डाला जाता है। एरीथ्रोसिन नामक रसायन कोकटेल में प्रयुक्त होता है। टमाटर के रस में नाइट्रेटस डाला जाता है। शाकभाजी के डिब्बों को बंद करते समय शाकभाजी के फलों में जो नमक डाला जाता है वह साधारण नमक से 45 गुना अधिक हानिकारक होता है।

इसलिए अपने और बच्चों के स्वास्थ्य के लिए और मेहमान-नवाजी के फैशन के लिए भी ऐसे बंद डिब्बों की शाकभाजी का उपयोग करके स्वास्थ्य को स्थायी जोखिम में न डालें।

शुक्रवार, 16 अप्रैल 2010

शराब पीने से हुए फ़ायदे को सिगरेट ख़त्म कर देती है

अगर आप थोड़ी-थोड़ी पिया करेंगे तो आपको दिल का दौरा पड़ने की संभावना कम रहेगी लेकिन अगर आपने इस दौरान सिगरेट पी ली तो ऐसा नहीं होगा. इस बात का पता ब्रिटेन में क़रीब 20 हज़ार लोगों पर किए गए एक शोध में चला है. इस दौरान पता चला कि थोड़ी शराब पीने वाले वे लोग जो सिगरेट नहीं पीते हैं उनमें सिगरेट पीने वालों की तुलना में दिल के दौरे की संभावना 40 फ़ीसदी तक कम होती है. इसका मतलब यह हुआ कि शराब पीने से हुए फ़ायदे को सिगरेट ख़त्म कर देती है. शोध के नतीजों को टोरोंटो में हुई अमरीकन एकेडमी ऑफ़ न्यूरोलॉजी की बैठक में पेश किया गया.

शोध का नेतृत्व कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय ने किया और इसमें 22, 254 लोगों को शामिल किया गया. इन लोगों पर 12 साल से अधिक समय तक नज़र रखी गई. इस दौरान क़रीब नौ सौ बार दिल के दौरे पड़े. एक या दो छोटे गिलास वाइन पीने वाली महिलाओं या इससे थोड़ी अधिक वाइन पीने वाले पुरुषों में दिल के दौरे की 37 फ़ीसदी कम संभावना देखी गई. लेकिन यह तभी तक ठीक था जब तक कि इन्होंने सिगरेट नहीं पी. सिगरेट और शराब पीने वाले और केवल सिगरेट पीने वालों में ख़तरे का समान स्तर देखा गया.

शोध के प्रमुख यांगमी ली कहते हैं, ''हमारे शोध के सामाजिक निहितार्थ हैं, इससे हम शराब और सिगरेट पीने और कम मात्रा में शराब पीने के ख़तरे और दिल के दौरों के बारे में समझ बना सकते हैं.'' अधिक मात्रा में शराब पीने से दिल के दौरे का ख़तरा बढ़ जाता है क्योंकि इससे ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है, यह एक महत्वपूर्ण कारक है.

शराब से ख़ून पतला हो जाता है, इससे ख़ून के थक्के बनना रुक सकता है. यह कोलेस्ट्रॉल को प्रभावित करता है और धमनियों की दीवारों पर वसा जमा होने से रोकता है. वहीं सिगरेट पीने से धमनियों में ख़ून का थक्का बनने की संभावना रहती है. इससे दिल का दौरा पड़ने का ख़तरा बढ़ जाता है.

द स्ट्रोक एसोसिएशन के जो कोरनर कहते हैं, ''सिगरेट पीने और दिल के दौरे में बहुत साफ़ संबंध हैं. दिल के दौरे से होने वाली मौतों का 10 फ़ीसदी का संबंध धूम्रपान से होता है. इसलिए दिल के दौरो को कम करने के लिए धूम्रपान छोड़ना महत्वपूर्ण क़दम है.''

गुरुवार, 18 मार्च 2010

80% व्यक्ति इंटरनेट को बुनियादी अधिकार मानते हैं

दुनिया के 26 देशों में हुए एक नए सर्वे में पाया गया है कि हर पांच में से चार शख्स इंटरनेट पहुँच को बुनियादी अधिकार मानते हैं। इन देशों में भारत भी शामिल है। सर्वे इन देशों के 27 हजार वयस्क लोगों के बीच किया गया। यह सर्वे बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के लिए ग्लोबस्कैन ने आयोजित किया।

सर्वे में शामिल 87 प्रतिशत लोगों ने कहा कि इंटरनेट तक पहुँच को सभी लोगों के लिए बुनियाद अधिकार होना चाहिए। सर्वे में शामिल लोगों में से कुल मिलाकर 79 प्रतिशत ने इस बात के प्रति किसी न किसी रूप में सहमति दिखाई कि इंटरनेट बुनियादी अधिकार है।

इंटरनेट पहुँच के अधिकार के प्रति मेक्सिको, ब्राजील और तुर्की जैसे देशों के प्रतिभागियों ने मजबूती से समर्थन दिखाया। सर्वे में शामिल तुर्की के 90 प्रतिशत से ज्यादा लोगों कहा कि इंटरनेट पहुँच बुनियादी अधिकार होना चाहिए। यह संख्या किसी यूरोपीय देश के मुकाबले कहीं ज्यादा थी। उत्तर कोरिया में सबसे ज्यादा 96 प्रतिशत लोगों ने कहा कि इंटरनेट ऐक्सेस बुनियादी अधिकार होना चाहिए।

सर्वे में शामिल ज्यादातर लोगों ने कहा कि इंटरनेट का जीवन पर सकारात्मक असर पड़ता है। हर पांच में से चार शख्स ने कहा कि इंटरनेट से हमें ज्यादा आजादी मिलती है। हालांकि सर्वे में शामिल कई इंटरनेट उपयोगकर्ताओं ने इंटरनेट जालसाजी और निजता को खतरे के प्रति चिंता का इजहार भी किया।

गुरुवार, 11 मार्च 2010

प्रतिदिन एक अंडा खाने से मोटापा कम किया जा सकता है

सब जानते हैं कि अंडा पोषक आहार है। लेकिन अब एक शोध का दावा है कि प्रतिदिन एक अंडा खाने से मोटापा कम किया जा सकता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक अंडे में विटामिन डी, विटामिन बी12, सेलेनियम और कोलिन होता है। ये तत्व मोटापा घटाने में मददगार हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, एक अंडे में करीब 80 कैलोरी होती है।

डेली मेल की खबर के अनुसार, प्रमुख शोधकर्ता और आहार विशेषज्ञ डा. केरी रक्सटन ने बताया, 'प्रतिदिन एक अंडा खाने से शरीर को आवश्यक पोषक तत्व मिलते रहते हैं। नए प्रमाणों से पता लगा है कि अंडा खाने से संतुष्टि का एहसास होने के साथ ही मोटापे पर नियंत्रण रहता है। अंडा आंखों के लिए भी फायदेमंद है।'

अध्ययन के मुताबिक, अंडे में कई लाभदायक अमीनो एसिड भी होते हैं। जो बच्चों और युवाओं के शारीरिक विकास के लिए अति आवश्यक हैं। शोध में दावा किया गया है कि अंडे में प्रचुर मात्रा में पाए जाने वाले एंटीआक्सीडेंट उम्र के साथ होने वाले मांसपेशियों के क्षय को भी रोकते हैं।